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डी. पी. जैन कंपनी पर 14 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप, मामला मानवाधिकार आयोग तक पहुंचा — ब्लैकलिस्ट की उठी मांग

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डी. पी. जैन कंपनी पर 14 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप, मामला मानवाधिकार आयोग तक पहुंचा — ब्लैकलिस्ट की उठी मांग…

वर्धा के कार्यकारी अभियंता एकनाथ टिकले को पहले राजस्व मंत्री बावनकुळे द्वारा नागपुर से हटा दिया गया था। इसके बाद जब वे वर्धा पहुंचे, तो आते ही उन्होंने कथित रूप से 14 करोड़ रुपये का घोटाला कर दिया।इस पूरे मामले को लेकर अब स्थानीय स्तर पर भारी नाराजगी देखी जा रही है। जनता की ओर से मांग उठ रही है कि एकनाथ टिकले को तत्काल प्रभाव से वर्धा से कार्यमुक्त किया जाए।साथ ही मुख्य अभियंता श्री माने से भी अपील की जा रही है कि वे इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए तुरंत प्रशासनिक कार्रवाई करें और संबंधित अधिकारी को वर्धा से हटाएं।

 

वर्धा (मंगेश चोरे पाटील)

नागपुर की एक नामचीन निर्माण कंपनी डी. पी. जैन पर वर्धा के सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) को लगभग 14 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान पहुंचाने का गंभीर आरोप सामने आया है। इस पूरे मामले में विभागीय अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है, जिससे यह प्रकरण और अधिक संवेदनशील बन गया है।प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, सार्वजनिक निर्माण विभाग के तत्कालीन कार्यकारी अभियंता एकनाथ टिकले की कथित मिलीभगत से यह घोटाला अंजाम दिया गया। आरोप है कि जिस काम के लिए कंपनी को भुगतान किया गया, वह कार्य जमीन पर किया ही नहीं गया, इसके बावजूद विभाग द्वारा लाखों रुपये का भुगतान मंजूर कर सीधे कंपनी के खाते में जमा कर दिया गया।सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि संबंधित अधिकारी ने काम की भौतिक जांच (फिजिकल वेरिफिकेशन) किए बिना ही भुगतान की प्रक्रिया पूरी कर दी। इससे यह स्पष्ट संकेत मिलते हैं कि यह मामला केवल लापरवाही का नहीं बल्कि संगठित भ्रष्टाचार (collusion) का हो सकता है।सूत्रों के अनुसार, डी. पी. जैन कंपनी के पास महाराष्ट्र के कई जिलों में निर्माण कार्य चल रहे हैं। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि इसी तरह की अनियमितताएं अन्य स्थानों पर भी हुई हो सकती हैं।इसलिए सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने सरकार से मांग की है कि कंपनी के सभी प्रोजेक्ट्स की उच्चस्तरीय जांच (High-Level Inquiry) कराई जाए

इस पूरे मामले को लेकर संबंधित पक्ष द्वारा मानवाधिकार आयोग में भी शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायत में कहा गया है कि सार्वजनिक धन का दुरुपयोग सीधे तौर पर नागरिकों के अधिकारों का हनन है, क्योंकि इससे विकास कार्य प्रभावित होते हैं और जनता को मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहना पड़ता है।

आयोग से इस मामले में निष्पक्ष और कठोर जांच की मांग की गई है, ताकि “दूध का दूध और पानी का पानी” हो सके।घोटाले की जानकारी सामने आने के बाद स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि“जिस कंपनी ने काम किए बिना पैसे लिए, उसे अब जिले में कोई भी काम नहीं करने दिया जाएगा।”जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने राज्य सरकार से मांग की है कि डी. पी. जैन कंपनी को तत्काल ब्लैकलिस्ट किया जाए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जाए और इस पूरे घोटाले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए यह मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी गंभीर होता जा रहा है। आने वाले दिनों में जांच के निष्कर्षों के आधार पर कई बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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